ॐ। पृथ्वी, वायुमंडल और आकाश—इन तीनों लोकों में फैली हुई दिव्य ऊर्जा के बीच हम बैठते हैं। हम सब मिलकर उस परम प्रकाशमान सूर्य—सवितृ देव—के अद्भुत तेज का ध्यान करते हैं। उसकी दिव्य ज्योति हमारे अंतःकरण को जागृत करे और हमारी बुद्धि को सही मार्ग दिखाए। इस प्रकार, हम सवितृ के प्रकाश में अपने विचारों और कर्मों को उज्ज्वल और शुद्ध करने का प्रयास करते हैं, ताकि जीवन में सत्य और ज्ञान का आलोक फैल सके।