प्रशशंसुः प्रशस्तव्यौ गायमानौ कुशीलवौ । अहो गीतस्य माधुर्यं श्लोकानां च विशेषतः ॥१-४-
लोगों ने उन दोनों कुशीलव गायक भाइयों की खूब सराहना की और कहा, 'वाह! इस गीत की मिठास क्या कहने, और श्लोक तो और भी मनभावन हैं।'
चिरनिर्वृत्तमप्येतत् प्रत्यक्षमिव दर्शितम् । प्रविश्य तावुभौ सुष्ठु तथाभावमगायताम् ॥१-४-
ये घटनाएँ भले ही बहुत पहले की हों, लेकिन जैसे सब कुछ आँखों के सामने हो रहा हो, वैसे ही दोनों ने आकर कथा को पूरी तरह जीते हुए गाया।