इत्येतेष्टत्रिंशदुत्तरमष्टशतं पंच प्रद्योताः पृथिवीं भोक्ष्यन्ति
इस प्रकार ये पाँच प्रद्योत कुल के राजा एक सौ अड़तीस वर्ष तक पृथ्वी पर राज्य करेंगे।
ततश्च शिशुनाभः
उनके बाद शिशुनाभ राजा बनेगा।
तत्पुत्रः काकवर्णो भविता
उसका पुत्र काकवर्ण होगा।
तस्य च पुत्रः क्षेमधर्मा
उसका पुत्र क्षेमधर्मा होगा।
तस्यापि क्षतौजाः
उसका पुत्र क्षतौजस होगा।
तत्पुत्रो विधिसारः
उसका पुत्र विधिसार होगा।
ततश्चाजातशत्रुः
उसके बाद अजातशत्रु राजा बनेगा।
तस्मादर्भकः
उससे अर्भक उत्पन्न होगा।
तस्माच्चोदयनः
उससे उदयन होगा।
तस्मादपि नंदिवर्द्धनः
उससे भी नंदिवर्धन उत्पन्न होगा।
ततो महानंदी
उसके बाद महानंदी राजा बनेगा।
इत्येते शैशनाभा भूपालास्त्रीणि वर्षशतानि द्विषष्ट्यधिकानि भविष्यंति
इस प्रकार ये शैशनाभ वंश के राजा तीन सौ बासठ वर्ष तक राज्य करेंगे।
महानंदिनस्ततश्शूद्रा गर्भोद्भवोतिलुब्धोतिबलो महापद्मनामा नंदः परशुराम इवापरोऽखिलक्षत्रांतकारी भविष्यति
फिर एक शूद्र स्त्री के गर्भ से महापद्म नाम का नंद जन्म लेगा, जो सत्ता का बहुत लोभी और बलवान होगा। वह परशुराम के समान सभी क्षत्रियों का नाश करेगा।
ततः प्रभृति शूद्रा भूपाला भविष्यंति
उस समय से शूद्र वंश के लोग ही राजा बनेंगे।
स चैकच्छत्रामनुल्लंघितशासनो महापद्मः पृथिवीं भोक्ष्यते
वह महापद्म नंद अकेला सम्राट बनेगा और उसकी आज्ञा का कोई उल्लंघन नहीं करेगा। वह पूरी धरती पर राज करेगा।
तस्याप्यष्टौ सुतास्सुमाल्याद्य भवितारः
उसके भी आठ पुत्र होंगे, जिनमें सुमाल्य सबसे पहले होगा।
तस्य महापद्मस्यानुपृथिवीं भोक्ष्यंति
महापद्म के ये पुत्र एक के बाद एक पृथ्वी पर राज्य करेंगे।
महापद्मपुत्राश्चैकं वर्षशतमवनीपतयो भविष्यंति
महापद्म के पुत्र सौ वर्ष तक पृथ्वी के राजा रहेंगे।
ततश्च नवचैतान्नंदान् कौटिल्यो ब्राह्मणस्समुद्धरिष्यति
इसके बाद कौटिल्य नाम का एक ब्राह्मण इन नौ नंदों का नाश करेगा।
तेषामभावे मौर्व्याः पृथिवीं भोक्ष्यंति
उनके न रहने पर मौर्य वंश के लोग पृथ्वी पर राज्य करेंगे।
कौटिल्य एव चंद्र गुप्तसुत्पन्नं राज्येऽभिषेक्ष्यति
कौटिल्य स्वयं मौर्य वंश में जन्मे चंद्रगुप्त का राज्याभिषेक करेगा।
तस्यापि पुत्रो बिंदुसारो भविष्यति
उसके भी बिंदुसार नाम का एक पुत्र होगा।
तस्याप्यशोकवर्द्धनस्ततस्सुयशास्ततश्च दशरथस्ततश्च संयुतस्ततश्शालिशूकस्तस्मात्सोमशर्मा तस्यापि सोमशर्मणश्शतधन्वा
उसका पुत्र अशोकवर्धन होगा, फिर सुयश, उसके बाद दशरथ, फिर संयुत, फिर शालिशुक, उसके बाद सोमशर्मा और फिर सोमशर्मा से शतधन्वा होगा।
तस्यानुबृहद्र थनामा भविता
उसके बाद बृहद्रथ नाम का राजा होगा।
एवमेते मौर्य्या दश भूपतयो भविष्यंति अब्दशतं सप्तत्रिंशदुत्तरम्
इस प्रकार ये दस मौर्य राजा एक सौ सैंतीस वर्ष तक राज्य करेंगे।
तेषामंते पृथिवीं दश शुंगा भोक्ष्यंति
इनके अंत में दस शुंग राजा पृथ्वी पर राज्य करेंगे।
पुष्यमित्रस्सेनापतिस्स्वामिनं हत्वा राज्यं करिष्यति तस्यात्मजोऽग्निमित्रः
पुष्यमित्र सेनापति अपने स्वामी को मारकर राज्य ले लेगा। उसका पुत्र अग्निमित्र होगा।
तस्मात्सुज्येष्ठस्ततो वसुमित्रस्तस्मादप्युदंकस्ततः पुलिंदकस्ततो घोषवसुस्तस्मादपि वज्रमित्रस्ततो भागवतः
उससे सुज्येष्ठ, फिर वसुमित्र, उसके बाद उदंक, फिर पुलिंदक, उसके बाद घोषवसु, फिर वज्रमित्र और उसके बाद भागवत होगा।
तस्माद्देवभूतिः
उसके बाद देवभूति होगा।
इत्येते शुंगा द्वादशोत्तरं वर्षशतं पृथिवीं भोक्ष्यंति
इस प्रकार ये शुंग राजा एक सौ बारह वर्ष तक पृथ्वी पर राज्य करेंगे।