इक्ष्वाकूणामयं वंशःसुमित्रान्तो भविष्यति । यतस्तं प्राप्य राजानं संस्थां प्राप्स्यति वै कलौ ॥ ४,२२.
इक्ष्वाकु वंश का यह क्रम सुमित्र तक पहुंचेगा; जब वह राजा आएंगे, तब कलियुग में यह वंश समाप्त हो जाएगा।
मागधानां बार्हद्रथानां भविष्याणामनुक्रमं कथयामि ।। ४-२३-
अब मैं मगध के बर्हद्रथ वंश के आगे के राजाओं का क्रम बताता हूँ।
अत्र हि वंशे महाबला जरासन्धप्रधानां बङूवुः ।। ४-२३-
इस वंश में बड़े बलशाली राजा हुए, जिनमें जरासंध सबसे प्रमुख थे।
श्रीपराशर उवाच । योऽयं रिपुंजयो नाम बार्हद्रथोंत्यः तस्यामात्यो मुनिको नाम भविष्यति
श्रीपराशर ने कहा — यह रिपुंजय, जो बर्हद्रथ वंश का अंतिम राजा है, इसका एक मंत्री मुनीक नाम का होगा।
स चैनं स्वामिनं हत्वा स्वुपुत्रं प्रद्योतनामानमभिषेक्ष्यति
वह अपने स्वामी को मारकर अपने ही पुत्र प्रद्योत को राजा बनाएगा।
तस्यापि बलाकनामा पुत्रो भविता
उसके भी बालक नाम का एक पुत्र होगा।
ततश्च विशाखयूपः
उसके बाद विषाखयूप राजा बनेगा।
तत्पुत्रो जनकः
उसका पुत्र जनक होगा।
तस्य च नंदिवर्द्धनः
उसका पुत्र नंदिवर्धन होगा।
इत्येतेष्टत्रिंशदुत्तरमष्टशतं पंच प्रद्योताः पृथिवीं भोक्ष्यन्ति
इस प्रकार ये पाँच प्रद्योत कुल के राजा एक सौ अड़तीस वर्ष तक पृथ्वी पर राज्य करेंगे।
ततश्च शिशुनाभः
उनके बाद शिशुनाभ राजा बनेगा।
तत्पुत्रः काकवर्णो भविता
उसका पुत्र काकवर्ण होगा।
तस्य च पुत्रः क्षेमधर्मा
उसका पुत्र क्षेमधर्मा होगा।
तस्यापि क्षतौजाः
उसका पुत्र क्षतौजस होगा।
तत्पुत्रो विधिसारः
उसका पुत्र विधिसार होगा।
ततश्चाजातशत्रुः
उसके बाद अजातशत्रु राजा बनेगा।
तस्मादर्भकः
उससे अर्भक उत्पन्न होगा।
तस्माच्चोदयनः
उससे उदयन होगा।
तस्मादपि नंदिवर्द्धनः
उससे भी नंदिवर्धन उत्पन्न होगा।
ततो महानंदी
उसके बाद महानंदी राजा बनेगा।
इत्येते शैशनाभा भूपालास्त्रीणि वर्षशतानि द्विषष्ट्यधिकानि भविष्यंति
इस प्रकार ये शैशनाभ वंश के राजा तीन सौ बासठ वर्ष तक राज्य करेंगे।
महानंदिनस्ततश्शूद्रा गर्भोद्भवोतिलुब्धोतिबलो महापद्मनामा नंदः परशुराम इवापरोऽखिलक्षत्रांतकारी भविष्यति
फिर एक शूद्र स्त्री के गर्भ से महापद्म नाम का नंद जन्म लेगा, जो सत्ता का बहुत लोभी और बलवान होगा। वह परशुराम के समान सभी क्षत्रियों का नाश करेगा।
ततः प्रभृति शूद्रा भूपाला भविष्यंति
उस समय से शूद्र वंश के लोग ही राजा बनेंगे।
स चैकच्छत्रामनुल्लंघितशासनो महापद्मः पृथिवीं भोक्ष्यते
वह महापद्म नंद अकेला सम्राट बनेगा और उसकी आज्ञा का कोई उल्लंघन नहीं करेगा। वह पूरी धरती पर राज करेगा।
तस्याप्यष्टौ सुतास्सुमाल्याद्य भवितारः
उसके भी आठ पुत्र होंगे, जिनमें सुमाल्य सबसे पहले होगा।
तस्य महापद्मस्यानुपृथिवीं भोक्ष्यंति
महापद्म के ये पुत्र एक के बाद एक पृथ्वी पर राज्य करेंगे।
महापद्मपुत्राश्चैकं वर्षशतमवनीपतयो भविष्यंति
महापद्म के पुत्र सौ वर्ष तक पृथ्वी के राजा रहेंगे।
ततश्च नवचैतान्नंदान् कौटिल्यो ब्राह्मणस्समुद्धरिष्यति
इसके बाद कौटिल्य नाम का एक ब्राह्मण इन नौ नंदों का नाश करेगा।
तेषामभावे मौर्व्याः पृथिवीं भोक्ष्यंति
उनके न रहने पर मौर्य वंश के लोग पृथ्वी पर राज्य करेंगे।
जरासचन्धसुतात् सहदेवचात सोमापिः, तस्मात् श्रुतवान्, तस्याप्ययुतायुः, ततश्व निरमित्रः तत्तनयः सुक्षत्रः, तस्मादपि बृहत्कर्म्मा, ततश्व सेनजित्, तस्माज्व श्रुतञ्जयः, ततो विप्रः, तस्य च पुत्रः शुचिनामा भविष्यति । तस्यापि क्षेम्यः, ततश्व सुव्रतादू धर्म्मः, ततः सुश्रमः, ततो दृढ़सेनः, ततः सुमतिः, तस्मात् सुबलः, तस्य सुनीतो भविता । ततः सत्यजित्, सत्यजितो विशजित्, तस्यापि रिपुञ्जयः पुत्रः, इत्येते बाहद्रथा भूपतयो वर्षसहस्त्रमेकं भविष्यन्ति ।। ४-२३-
जरासंध के पुत्र से सहदेव, फिर सोमापि; उनसे श्रुतवान, उनके पुत्र अयुतायु, फिर निरमित्र, उनके पुत्र सुक्षत्र; उनसे बृहद्कर्मा, फिर सेनाजित, उनसे श्रुतंजय, फिर विप्र, उनके पुत्र शुचि होंगे। उनसे क्षेम्य, फिर सुव्रत से धर्म, फिर सुश्रमा, फिर दृढ़सेन, फिर सुमति, उनसे सुबल, उनके पुत्र सुनीत होंगे। फिर सत्यजित, सत्यजित से विशजित, उनके पुत्र रिपुंजय होंगे। ये बर्हद्रथ वंश के राजा एक हजार वर्ष तक राज्य करेंगे।