तस्मादुरुक्षयस्तस्माच्च वत्सव्यूहस्ततश्च प्रतिव्योमस्तस्मादपि दिवाकरः ॥ ४,२२.
उनसे उरुक्षय, उनसे वत्सव्यूह, फिर प्रतिव्योम, उनसे दिवाकर उत्पन्न होंगे।
तस्मात्सहदेवः सहदेवाद्बृहदश्वस्तत्सूनुर्भानुरथस्तस्य च प्रतीताश्वस्तस्यापि सुप्रतीकस्ततश्च मरुदेवस्ततः सुनक्षत्रस्तमात्किन्नरः ॥ ४,२२.
उनसे सहदेव, सहदेव से बृहदश्व, उनके पुत्र भानुरथ, उनसे प्रतीताश्व, उनसे सुप्रतीक, फिर मरुदेव, उनसे सुनक्षत्र, उनसे किन्नर होंगे।
किन्नरादन्तरिक्षस्तस्मात्सुपर्णस्ततश्चामित्रजित् ॥ ४,२२.
किन्नर से अंतरिक्ष, उनसे सुपर्ण, फिर अमित्रजित होंगे।
ततश्च बृहद्भाजस्तस्यापि धर्मी धर्मीणः कृतञ्जयः ॥ ४,२२.
फिर बृहद्भाज, उनके पुत्र धर्मी, धर्मी से कृतंजय होंगे।
कृतञ्जयाद्रणञ्जयः ॥ ४,२२.
कृतंजय से रणंजय उत्पन्न होंगे।
रणञ्जयात्संजयस्तस्माच्छाक्यश्छाक्याच्छुद्धोदनस्तस्माद्राहुलस्ततः प्रसेनजित् ॥ ४,२२.
रणंजय से संजय, उनसे शाक्य, शाक्य से शुद्धोधन, उनसे राहुल, फिर प्रसैनजित होंगे।
ततश्च क्षुद्रकस्ततश्चज कुण्डकस्तस्मादपि सुरथः ॥ ४,२२.
फिर क्षुद्रक, फिर कुण्डक, उनसे सुरथ होंगे।
तत्पुत्रश्च सुमित्रः ॥ ४,२२.
उनके पुत्र सुमित्र होंगे।
इत्येते चेक्ष्वाकवो बृहद्बलान्वयाः ॥ ४,२२.
इस प्रकार ये बृहद्बल के वंशज इक्ष्वाकु वंश के राजा हैं।
अत्रानुवंशश्लोकः ॥ ४,२२.
यहाँ वंश के बारे में श्लोक है।
इक्ष्वाकूणामयं वंशःसुमित्रान्तो भविष्यति । यतस्तं प्राप्य राजानं संस्थां प्राप्स्यति वै कलौ ॥ ४,२२.
इक्ष्वाकु वंश का यह क्रम सुमित्र तक पहुंचेगा; जब वह राजा आएंगे, तब कलियुग में यह वंश समाप्त हो जाएगा।
मागधानां बार्हद्रथानां भविष्याणामनुक्रमं कथयामि ।। ४-२३-
अब मैं मगध के बर्हद्रथ वंश के आगे के राजाओं का क्रम बताता हूँ।
अत्र हि वंशे महाबला जरासन्धप्रधानां बङूवुः ।। ४-२३-
इस वंश में बड़े बलशाली राजा हुए, जिनमें जरासंध सबसे प्रमुख थे।
श्रीपराशर उवाच । योऽयं रिपुंजयो नाम बार्हद्रथोंत्यः तस्यामात्यो मुनिको नाम भविष्यति
श्रीपराशर ने कहा — यह रिपुंजय, जो बर्हद्रथ वंश का अंतिम राजा है, इसका एक मंत्री मुनीक नाम का होगा।
स चैनं स्वामिनं हत्वा स्वुपुत्रं प्रद्योतनामानमभिषेक्ष्यति
वह अपने स्वामी को मारकर अपने ही पुत्र प्रद्योत को राजा बनाएगा।
तस्यापि बलाकनामा पुत्रो भविता
उसके भी बालक नाम का एक पुत्र होगा।
ततश्च विशाखयूपः
उसके बाद विषाखयूप राजा बनेगा।
तत्पुत्रो जनकः
उसका पुत्र जनक होगा।
तस्य च नंदिवर्द्धनः
उसका पुत्र नंदिवर्धन होगा।
इत्येतेष्टत्रिंशदुत्तरमष्टशतं पंच प्रद्योताः पृथिवीं भोक्ष्यन्ति
इस प्रकार ये पाँच प्रद्योत कुल के राजा एक सौ अड़तीस वर्ष तक पृथ्वी पर राज्य करेंगे।
ततश्च शिशुनाभः
उनके बाद शिशुनाभ राजा बनेगा।
तत्पुत्रः काकवर्णो भविता
उसका पुत्र काकवर्ण होगा।
तस्य च पुत्रः क्षेमधर्मा
उसका पुत्र क्षेमधर्मा होगा।
तस्यापि क्षतौजाः
उसका पुत्र क्षतौजस होगा।
तत्पुत्रो विधिसारः
उसका पुत्र विधिसार होगा।
ततश्चाजातशत्रुः
उसके बाद अजातशत्रु राजा बनेगा।
तस्मादर्भकः
उससे अर्भक उत्पन्न होगा।
तस्माच्चोदयनः
उससे उदयन होगा।
तस्मादपि नंदिवर्द्धनः
उससे भी नंदिवर्धन उत्पन्न होगा।
जरासचन्धसुतात् सहदेवचात सोमापिः, तस्मात् श्रुतवान्, तस्याप्ययुतायुः, ततश्व निरमित्रः तत्तनयः सुक्षत्रः, तस्मादपि बृहत्कर्म्मा, ततश्व सेनजित्, तस्माज्व श्रुतञ्जयः, ततो विप्रः, तस्य च पुत्रः शुचिनामा भविष्यति । तस्यापि क्षेम्यः, ततश्व सुव्रतादू धर्म्मः, ततः सुश्रमः, ततो दृढ़सेनः, ततः सुमतिः, तस्मात् सुबलः, तस्य सुनीतो भविता । ततः सत्यजित्, सत्यजितो विशजित्, तस्यापि रिपुञ्जयः पुत्रः, इत्येते बाहद्रथा भूपतयो वर्षसहस्त्रमेकं भविष्यन्ति ।। ४-२३-
जरासंध के पुत्र से सहदेव, फिर सोमापि; उनसे श्रुतवान, उनके पुत्र अयुतायु, फिर निरमित्र, उनके पुत्र सुक्षत्र; उनसे बृहद्कर्मा, फिर सेनाजित, उनसे श्रुतंजय, फिर विप्र, उनके पुत्र शुचि होंगे। उनसे क्षेम्य, फिर सुव्रत से धर्म, फिर सुश्रमा, फिर दृढ़सेन, फिर सुमति, उनसे सुबल, उनके पुत्र सुनीत होंगे। फिर सत्यजित, सत्यजित से विशजित, उनके पुत्र रिपुंजय होंगे। ये बर्हद्रथ वंश के राजा एक हजार वर्ष तक राज्य करेंगे।