देवताओं के राजा इन्द्र ने जब युद्ध के लिए वरदान माँगा, तब वरदाता चन्द्रदेव ने कहा, “हे देवेंद्र, जो तुम मुझसे युद्ध के लिए माँगते हो, वह मैं अब भेज रहा हूँ—मेरी शीतलता, जो दानवों के मायाजाल को दूर कर देगी।” इसके बाद चन्द्रदेव ने अपनी शीतलता का प्रभाव प्रकट किया। जिन दानवों को यह शीतलता छू गई, वे बर्फ से ढँक गए, उनके अभिमान और माया नष्ट हो गए, और वे सिंह के समान पराक्रमी दानव उस महायुद्ध में निर्बल हो गए। ऐसा कहकर, नक्षत्रों के स्वामी, जलों के अधिपति चन्द्रदेव ने शिव की पवित्र जलधारा से देवताओं की सेनाओं को शांति और शक्ति प्रदान की। चन्द्रमा की छोड़ी हुई हिमवर्षा, रस्सियों के समान, उन भयंकर दानवों को बादलों के समूह की तरह चारों ओर से बाँधने लगी। इस प्रकार, चन्द्रदेव की शीतल शक्ति ने युद्ध के क्षेत्र में दानवों की माया और बल को हर लिया।