मन्दराचलवासिनी सा देवी, शारदा नाम्ना, सुवर्णमाल्याभरणा विराजते। कमलवदना, कमलोपमा, नित्यतुष्टा, सोमरससमुत्पन्ना च सा। सा महेन्द्रभगिनी, पूज्या, वरणीया, वरप्रदा च। स्तुत्या सैव, वरदा, वन्द्या, अजिता, दुस्तरा च। सा भद्रकाली, जगज्जननी, भक्तानां श्रियं दात्री च। या या शोभामयी, यशोदा, षड्गत्यतीता च। चैत्रमासस्वामिनी, संवत्सरारूढा, इन्द्रतनया, विश्वपूरिका च सा। सा खगध्वजा, विहंगमारूढा, परममूल्या, परममाल्यभूषिता च। सा विजया, हृदयगुहायां रम्या, गभीरनिवासिनी, गणानां प्रमुखा च। कलियुगदोषनाशिनी, गुह्योपनिषदां परा च सा। भोगमोक्षरूपिणी, मङ्गलामृतस्वरूपा, जगन्नाथदेवदेवेश्वरस्वामिनी च। अनन्तशयनात्यन्तवियोगिनी, नरनारायणसम्भूता च सा। संकर्षणोदिता, अम्बिकापदाश्रिता च। सा तेजस्विनी, सुस्तनी, गौरवर्णा, धर्मकामार्थमोक्षप्रदा च। महासिद्धिदात्री, मध्यमरूपा, कमललोचना, समदर्शिनी च सा। सर्वशक्त्युपविष्टा, धर्माधर्मार्थातीताच। सा गम्भीराश्रया, नित्यनिलयवर्तिनी च। गणाम्बिका, गिरिसुता, निशुम्भनाशिनी च सा। अनन्तरूपा, अनुपमवासिनी, शङ्करी, शान्तमना च। गौः, गौरी, गोप्रियका, गौणिका, गणपतिपूजिता च सा। सर्वशास्त्राधारभूता, संख्ययोगसमुत्थिता, संख्यसंख्ये प्रतिष्ठिता च। बिन्दुनादसमुत्पन्ना, शम्भुप्रिया, शशिधवलप्रभा च सा। सा महालक्ष्मीः, श्रीजननी, तमसः परा च। शान्त्यतीता, मलातीताच, नित्यनिरपेक्षा च सा। दैत्यदानवकर्त्री, कश्यपजा, कालमाना च। नारायणी, नरसम्भूता, प्रकाशिनी, लिङ्गधारिणी च सा। परान्तसम्भूता, वडवामुखी, सुनेत्रा च। सा बुद्धिस्वरूपिणी, क्रोधजननी, महाक्रोधनिधिः च। सा शोचनीया न, नानाव्यापा, सुवर्णरजतप्रिया च। या दीप्तिमती, दुर्निरीक्षा, ज्योतिष्टोमफलप्रदा च। दीर्घग्रीवा, मनोज्ञा, शान्तिदात्री, शमवर्धिनी च सा। त्रिशक्तिमाता, जाताऽपि षडूर्मिविजयिन्यपि सा। संहर्त्री, जगद्धारिणी, काममूलिका, मुकुटिनी च। प्रद्युम्नप्रियका, संयता, द्विदृष्टिका, त्रिनेत्रा च सा। वृषवहना, व्योममाता, विन्ध्यवासिनी च। चानूरनाशिनी कन्या, धर्मज्ञा, कामरूपिणी च सा। वीरभद्रप्रियका, शूरा, महाकालसम्भवा च। पोषयित्री, हरित्री, शोधयित्री, पुष्टिदात्री, विपुला च सा। हलिनी, सुधावर्षिणी, वीणावादनतत्परा च। अरुन्धती, कनकनेत्रा, शशाङ्कचिह्ना, मानप्रदा च सा। एवं देवी भगवती सर्वरूपा, सर्वशक्तिसंयुक्ता, भक्तजनानां मंगलमावहति।