शृणु, देवीकथामिमां पवित्रां संप्रवक्ष्यामि। या देवी कौशिकी, या रजनी, या देवतानां दुःखनाशिनी, सा भक्तक्लेशविनाशिनी, शुभा, संसारभवविनाशिनी च। सा कीर्तिमती, सामगानरूपिणी, भवदेहनिकेतना चास्ति। या पराविद्या, सर्वोत्कृष्टा, सर्वसिद्धिप्रदा, निर्मला, निरालम्बा, नित्यसिद्धा, व्याधिरहिताचैव। सा निर्णयशून्या, व्यथारहिताऽपि, विनया च स्वयं विनयदायिनी च। या महादेवी दुर्गा, या वासुदेवसम्भवा, सा ज्ञानस्वरूपा, ज्ञेयत्वं च, जरातीतास्य वेदान्तवेद्या च लक्ष्यरूपिणी। या योगमाया, व्यक्त्या विज्ञेया, महमाया, परमा चास्ति। बीजसञ्चारसमुत्पन्ना, महाशक्तियुक्ता, गम्भीरबुद्धिः। सा विकाररूपिणी, लोकोपपत्ति, शास्त्रविदुषी, गणगन्धर्वसेविता। या महारात्रिः, शिवप्रियासुखदा, शची, दुःस्वप्ननाशिनी च। या गुह्यांबिका, गुणसम्भवा, महापीठरूपिणी, मरुद्दुहितरपि। सा जगद्योनिर्जगन्माता, जन्ममरणजरातीताऽपि। या शक्तिसम्पन्ना, ध्यानस्थिता, त्रिनेत्रा, दिविसंस्थिताऽपि। सा संसारार्णवतरणविद्या, ब्रह्मनिष्ठमानसविलयकारिणी। या सुवर्णमयी, महारात्रिः, संसारचक्रवर्तिनी च। सा बोधयित्री, सर्वसहिष्णु, सर्वनिश्चयसाक्षिणी च। या भावशुद्धिप्रदायिनी, शुद्धस्वरूपा, त्रिमलनाशिनी च। या निरालम्बा, निराधारा, निर्झरवनोत्पन्ना च। सा परापरविन्यस्तविभागज्ञा, महापुरुषज्येष्ठजा च। या विज्ञानमयी, सहस्राक्षी, सहस्रवदनसम्भवा च। सा प्रक्षालिनी, सारमयी, विश्वव्यापिनी, दीप्तिमती, कमलप्रबोधिनी च। या व्योमान्तर्देवी, सिंहवाहना, विवेकशीलाऽनन्ततेजस्विनी च। या अनाहता, कुण्डलिनी, कमला, कमलालयवसिनी च। सा वाग्देवी, ब्रह्मांशरूपिणी, अंशातीताऽप्यंशप्रसूः। या व्योमशक्ति, क्रियाशक्ति, ज्ञानशक्ति, परमार्गा च। सा अविभक्ता विभक्तरूपा, वंशीवती, वंशहरिण्यपि। या भगिनी, श्रीपतिपत्नी, पूर्णा, कालकर्ता च। सा प्रक्रिया, योगमातृ, गङ्गा, जगन्नाथेश्वरी च। या सती, पद्मिनी, भोक्त्री, इन्द्रपुरीश्रेष्ठा च। या पञ्चब्रह्मसम्भवा, परमार्थस्वरूपिणी। सा मोहिनी, मनःपाला, तपस्विनी, वेदारूपा च। या जननी, योगेश्वराधीश्वरी, महाशक्ति, मानससंभवा च। सा दिव्यकन्या, पूज्या, सुरभिः, नन्दिनी, नन्दिप्रियाऽपि। या सर्वायुधसंपन्ना, काम्या, परमकामेश्वरी च। या कुष्माण्डी, धनरत्नसमृद्धा, सुरभिगन्धप्रदा च। सा दुर्लभा, निधिपाला, सौभाग्यवती, पिङ्गलोचना च। या आद्या, हृदयपद्मजा, गौमध्येया, रणप्रियाऽपि। सा दुर्गा, कात्यायनी, उग्रचण्डिका, चार्चिका, शान्तस्वरूपिणी च। एवं देवी सर्वरूपा, सर्वशक्तिसम्पन्ना, भक्तानां दुःखनाशिनी, जगन्माता च वर्तते।