सा महालक्ष्मी रूपेण उत्पन्ना ब्रह्मस्य कारणं, सर्वोत्कृष्टा च विराजते। सा सर्वस्य आधारभूता, सूक्ष्मा, अविद्या च परमार्थस्वरूपा। विविधरूपा सा त्रिकालातीतत्वेन स्थित्वा, ब्रह्मा, ईश्वर, विष्णु च तयोः जननी, ब्रह्मा नाम्ना ब्रह्मणः शरणं। सा जलसम्भूता, स्वयम्भूता, मनसो जाताऽथ तत्त्वोत्पन्ना। भवानी, रुद्राणी, महालक्ष्मी, अंबिका च सैव। सर्वेश्वरी, पूज्या, सदा हृष्टहृदया। भगवतः अर्धपीठे उपविष्टा, महेश्वरस्य पतिव्रता। हिमवतः कन्या पार्वती, परमसुखप्रदा। सा सावित्री, कमला, लक्ष्मी, श्रीरूपेण अनन्तस्य वक्षसि स्थित्वा। सरस्वती, सर्वविद्या, जगति ज्येष्ठा, शुभा च। योगेश्वरी, ब्रह्मविद्या, महाज्ञानस्वरूपा, परमसुन्दरी। स्वाहा, विश्वम्भरा, सिद्धि, स्वधा, मेधा, धृति, श्रुति च सैव। अजा, दीप्तिमती, सौम्या, भोक्त्री, भोगप्रदा। त्रिलोक्यां परमसुन्दरी, रम्या, मनोहरा, इच्छानुसारं विहरन्ती। पद्ममालया भूषिता, पापहरिणी, अद्भुता, मुकुटयुक्तमुखा। सूर्यसमा दीप्त्या, कुमारीरूपा, श्रेष्ठमयूरवाहिनी। अदिति, दृढा, तीक्ष्णा, पद्मयोनि, विवाहयोग्या। महाफलदायिनी, निर्भागा अङ्गानि, कामपूरणी, रात्रौ दीप्तिमती। कौशिकी, आकर्षिणी, रात्रिः, देवदुःखनाशिनी। भक्तानां दुःखविनाशिनी, शुभा, संसारनाशिनी। प्रसिद्धा, सामगीतिरूपा, भवशरीरधामवासिनी। सर्वोत्तमा विद्या, सर्वसिद्धिदायिनी। निर्मला, निराधारा, नित्यसिद्धा, व्याधिहीना। निरवस्था, निरुपद्रवा, विनयस्वरूपा, विनयदायिनी। सा महादुर्गा, वसुदेवसम्भूता। या ज्ञानं च ज्ञेयम्, जरातीतं, वेदान्ते निर्दिष्टं लक्ष्यं। योगमाया, प्रकाशरूपेण ज्ञाता, महामाया, उत्तमा। बीजाङ्कुरसम्भूता, महाशक्तियुक्ता, गूढज्ञानवती। परिवर्तना, लोकसम्बद्धा, शास्त्रज्ञा, गणगन्धर्वसेविता। महरात्रिः, शिवसुखदा, शची, दुष्टस्वपननाशिनी। गुह्यांबिका, गुणोत्पत्तिस्थानं, महासनं, मरुत्कन्या। सा जगज्जननी, जगन्माता, जन्ममृत्युजरातीतं। शक्तिस्वरूपा, ध्यानस्थित्या, त्रिनेत्री, दिविस्थिता। सा ज्ञानं, यद् संसारसागरं तारयति, ब्रह्मनिष्ठमानसां विलापयन्ती। सुवर्णरूपा, महरात्रिः, संसारचक्रप्रवर्तिनी। सा जाग्रयित्री, सर्वसहनवती, सर्वनिश्चयस्य साक्षिणी। सा सत्त्वशुद्धिकरणी, शुद्धस्वरूपा, त्रिमलनाशिनी। निराधारा, निरुपजीव्या, निर्अङ्कुरवनसम्भूता। एवं सा देवी, अनन्तरूपा, सर्वकारणस्वरूपा, भक्तानां परमाश्रयः, सर्वसिद्धिदायिनी च विराजते।