दिवोदासान्मित्रयुश्च मित्रयोश्च्यवनोऽभवत् । सुदासश्च्यवनाज्जज्ञे सौदासस्तस्य जात्मजः ॥ १,१४०.
दिवोदास से मित्रायु, मित्रायु से च्यवन, च्यवन से सुदास और सुदास से उनके अपने पुत्र सौदास उत्पन्न हुए।
सहदेवस्तस्य पुत्रः सहदेवात्तु सोमकः । जन्तुस्तु सोमकाज्जज्ञे पृषतश्चापरो महान् ॥ १,१४०.
सौदास के पुत्र सहदेव हुए, सहदेव से सोमक, सोमक से जन्तु और एक अन्य महान पुत्र पृषत उत्पन्न हुए।
पृषताद्द्रुपदो जज्ञे धृष्टद्युम्नस्ततोऽभवत् । धृष्टद्युम्नाद्धृष्टकेतुरृक्षोऽभूतजमीढतः ॥ १,१४०.
पृषत से द्रुपद जन्मे, उनसे धृष्टद्युम्न, धृष्टद्युम्न से धृष्टकेतु और अजमीढ से ऋक्ष उत्पन्न हुए।
ऋक्षात्संवरणो जज्ञे कुरुः संवरणादभूत् । सुधनुश्च पीक्षिच्च जह्नुश्चैव कुरोः सुताः ॥ १,१४०.
ऋक्ष से संवरण जन्मे, संवरण से कुरु, और कुरु के पुत्र सुधनु, पीक्षि और जह्नु हुए।
सुधनुषः सुहोत्रोऽभूच्च्यवनोऽभूत्सुहोत्रतः । च्यवनात्कृतको जज्ञे तथोपरिचरो वसुः ॥ १,१४०.
सुधनु से सुहोत्र, सुहोत्र से च्यवन, च्यवन से कृतक और फिर उपरिचर वसु उत्पन्न हुए।
बृहद्रथश्च प्रत्यग्रः सत्याद्याश्च वसोः सुताः । बृहद्रथात्कुशाग्रश्च कुशाग्रादृषभोऽभवत् ॥ १,१४०.
वसु के पुत्र बृहद्रथ, प्रत्यग्र और सत्यादि हुए। बृहद्रथ से कुशाग्र और कुशाग्र से ऋषभ उत्पन्न हुए।
ऋषभात्पुष्पवांस्तस्माज्जज्ञे सत्यहितो नृपः । सत्यहितात्सुधन्वाभूज्जह्रुश्चव सुधन्वनः ॥ १,१४०.
ऋषभ से पुष्पवान् उत्पन्न हुए, उनसे सत्यहित नामक राजा हुए। सत्यहित से सुधन्वा और सुधन्वा से जह्नु का जन्म हुआ।
बृहद्रथाज्जरासन्धः सहदेवस्तदात्मजः । सहदेवाच्च च सोमापिः सोमापेः श्रुतवान्सुतः ॥ १,१४०.
बृहद्रथ से जरासंध हुए, उनके पुत्र सहदेव थे। सहदेव से सोमापि और सोमापि से श्रुतवान् नामक पुत्र उत्पन्न हुए।
भीमसेनोग्रसेनौ च श्रुतसेनोऽपराजितः । जनमेजयस्तथान्योऽभूज्जह्नोस्तु सुरथोऽभवत् ॥ १,१४०.
भीमसेन और उग्रसेन से श्रुतसेन और अपराजित नामक पुत्र हुए। जनमेजय भी एक अन्य पुत्र थे, और जह्नु से सुरथ का जन्म हुआ।
विदूरथस्तु सुरथात्सार्वभौमो विदूरथात् । जयसेनः सार्वभौमादावधीतस्तदात्मजः ॥ १,१४०.
विदूरथ से सुरथ उत्पन्न हुए, सुरथ से सार्वभौम और विदूरथ से जयसेन हुए। सार्वभौम के पुत्र अवधीत हुए।
अयुतायुस्तस्य पुत्रस्तस्य चाक्रोधनः सुतः । अक्रोधनस्यातिथिश्च ऋक्षोऽभूदतिथेः सुतः ॥ १,१४०.
अयुतायुस उनके पुत्र थे, उनके पुत्र अक्रोधन हुए। अक्रोधन से अतिथि और अतिथि से ऋक्ष का जन्म हुआ।
ऋक्षाच्च भीमसेनोऽभूद्दिलीपो भीमसेनतः । प्रतीपोऽभूद्दिलीपाच्च देवापिस्तु प्रतीपतः ॥ १,१४०.
ऋक्ष से भीमसेन, भीमसेन से दिलीप, दिलीप से प्रतीप और प्रतीप से देवापि उत्पन्न हुए।
शन्तनुश्चैव बाह्लीकस्त्रयस्ते भ्रातरो नृपाः । बाह्लीकात्सोमदत्तोऽभूद्भूरिर्भूरिश्रवास्ततः ॥ १,१४०.
शांतनु, बाह्लीक और एक अन्य—ये तीनों भाई राजा थे। बाह्लीक से सोमदत्त और उनसे भूरि तथा भूरिश्रवा हुए।
शलश्च शन्तनोर्भोष्मो गङ्गायां धार्मिको महान् । चित्राङ्गदविचित्रौ तु सत्यवत्यान्तु शन्तनोः ॥ १,१४०.
शांतनु के पुत्र शल थे, और गंगा से धर्मात्मा भीष्म का जन्म हुआ। सत्यवती से शांतनु के चित्रांगद और विचित्रवीर्य नामक पुत्र हुए।
भार्ये विचित्रवीर्यस्य त्वम्बिकाम्बालिके तयोः । धृराष्ट्रं च पाण्डुञ्च तद्दास्यां विदुरन्तथा ॥ १,१४०.
विचित्रवीर्य की पत्नियाँ अम्बिका और अम्बालिका थीं। उनसे धृतराष्ट्र और पाण्डु उत्पन्न हुए, और दासी से विदुर का जन्म हुआ।
व्यास उत्पादयामास गान्धागी धृतराष्ट्रतः । शतपुत्रं दुर्योधनाद्यं पाण्डोः पञ्च प्रजज्ञिरे ॥ १,१४०.
व्यास ने गांधारी से धृतराष्ट्र उत्पन्न किए, जिनके सौ पुत्र हुए, जिनमें दुर्योधन सबसे बड़ा था। पाण्डु से पाँच पुत्र उत्पन्न हुए।
प्रतिबिन्ध्यः श्रुतसोमः श्रुतकीर्तिस्तथार्जुनात् । शतानीकः श्रुतकर्मा द्रौपद्यां पञ्च वै क्रमात् ॥ १,१४०.
प्रतिबंध्य, श्रुतसोम, श्रुतकीर्ति, शतानिक और श्रुतकर्म—ये पाँचों द्रौपदी के पुत्र थे, जो क्रम से पाँचों पाण्डवों से उत्पन्न हुए।
यौधेयी च हिडिम्बा च कौशी चैव सुभद्रिका । विजया वै रेणुमती पञ्चभ्यस्तु सुताः क्रमात् ॥ १,१४०.
यौधेयी, हिडिम्बा, कौशी, सुभद्रिका, विजय और रेणुमती—ये पाँचों भाइयों की पत्नियाँ थीं, जिनसे उनके पुत्र हुए।
देवको घचोत्कचश्च ह्यभिमन्युश्च सर्वगः । सुहोत्रो निरमित्रश्च परीक्षिदभिमन्युजः ॥ १,१४०.
देवक, घा, उत्कच, अभिमन्यु, सुहोत्र, निरमित्र और अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित हुए।
जनमेजयोऽस्य ततो भविष्यांश्च नृपाञ्छृणु ॥ १,१४०.
उनके पुत्र जनमेजय हुए। अब आगे के राजाओं को सुनो।
श्रीगरुडमहापुराणम् १४१ हरिरुवाच । शतानीको ह्यश्वमेधदत्तश्चाप्यधिसोमकः । कृष्णोऽनिरुद्धश्चाप्युष्णस्ततश्चित्ररथो नृपः ॥ १,१४१.
हरि बोले—शतानिक, अश्वमेधदत्त, अधिसोमक, कृष्ण, अनिरुद्ध, उष्ण और फिर चित्ररथ राजा हुए।
शुचिद्रथो वृष्णिमांश्च सुपेणश्च सुनीथकः । नृचक्षुश्च मुखाबाणः मेधावी च नृपञ्जयः ॥ १,१४१.
शुचिद्रथ, वृष्णिमान, सुपेण, सुनीथक, नृचक्षु, मुखाबाण, मेधावी और नृपंजय इनके बाद हुए।
पारिप्लवश्च मुनयो मेधावी च नृपञ्जयः । बृहद्रथो हरिस्तिग्मो शतानीकः सुदानकः ॥ १,१४१.
पारिप्लव, मेधावी, नृपंजय, बृहद्रथ, हरिस्तिग्म, शतानिक और सुदानक आगे हुए।
उदानोऽह्निनरश्चैव दण्डपाणिर्निमित्तकः । क्षेमकश्च ततः शूद्रः पिता पूर्वस्ततः सुतः ॥ १,१४१.
उदान, अह्निनर, दण्डपाणि, निमित्तक और फिर क्षेमक हुए। उनके बाद शूद्र और फिर उनके पुत्र, जो पहले पिता थे, हुए।
बृहद्बलास्तु कथयन्ते नृपोश्चैक्ष्वाकुवंशजाः । बृहद्बलादुरुक्षयो वत्सव्यूहस्ततः परः ॥ १,१४१.
बृहद्बल और इक्ष्वाकु वंश में जन्मे अन्य राजा भी बताए जाते हैं। बृहद्बल के बाद उरुक्षय, फिर वत्सव्यूह और उसके बाद अन्य राजा हुए।
वत्सव्यूहात्ततः सूर्यः सहदेवस्तदात्मजः । बृहदश्वो भानुरथः प्रतीच्यश्च प्रतीतकः । मनुदेवः सुनक्षत्रः किन्नरश्चान्तरिक्षकः ॥ १,१४१.
वत्सव्यूह से सूर्य, फिर उनके पुत्र सहदेव हुए। उनके बाद बृहदश्व, भानुरथ, प्रतीच्य, प्रतीतक, मनुदेव, सुनक्षत्र, किन्नर और अंतरिक्षक हुए।
सुपर्णः कृतजिच्चैव बृहद्भ्राजश्च धार्मिकः । कृतञ्जयो धनञ्जयः संजयः शाक्य एव च ॥ १,१४१.
सुपर्ण, कृतजित और धर्मात्मा बृहद्भ्राज, फिर कृतंजय, धनंजय, संजय और शाक्य हुए।
शुद्धोदनो बाहुलश्च सेनजित्क्षुद्रकस्तथा । सुमित्रः कुडवश्चातः सुमित्रान्मागधाञ्छणु ॥ १,१४१.
शुद्धोधन, बाहुल, सेनजित और क्षुद्रक, फिर सुमित्र, कुडव और सुमित्र से मगध वंश के राजा हुए।
जरासन्धः सहदेवः सोमापिश्च श्रुतश्रवाः । अयुतायुर्निरमित्रः सुक्षत्रो बहुकर्मकः ॥ १,१४१.
जरासंध, सहदेव, सोमापि, श्रुतश्रवा, अयुतायु, निरमित्र, सुक्षत्र और बहुकर्मक हुए।
श्रुतञ्जयः सेनजिच्च भूरिश्चैव शुचिस्तथा । क्षेम्यश्च सुव्रतो धर्मः श्मश्रुलो दृढसेनकः ॥ १,१४१.
श्रुतंजय, सेनजित, भूरि और शुचि, फिर क्षेम्य, सुव्रत, धर्म, श्मश्रुल और दृढ़सेनक हुए।