महामना महाशालदुशीनर इह स्मृतः । अशीनराच्छिबिर्जज्ञे वृषदर्भः शिवेः सुतः ॥ १,१३९.
यहाँ महा-मनस्वी महाशाल दुशीनर के नाम से प्रसिद्ध हैं। असीनर से शिबि उत्पन्न हुए, और शिबि के पुत्र वृषदर्भ हुए।
महामनोजात्तितिक्षोः पुत्रोऽभूच्च रुषद्रथः । हेमो रुषद्रथाज्जज्ञे सुतपा हेमतोऽभवत् ॥ १,१३९.
महा-मनोजात के पुत्र तितिक्षु के पुत्र रुषद्रथ हुए। रुषद्रथ से हेम उत्पन्न हुए, और हेम से सुतपा हुए।
बलिः सुतपसो जज्ञे ह्यङ्गवङ्गकलिङ्गकाः । अन्धः पैण्ड्रश्च बालेया ह्यनपानस्तथाङ्गतः ॥ १,१३९.
सुतपा से बली उत्पन्न हुए, और उनसे अंग, वंग, कलिंग आदि हुए। बली के पुत्रों में अंध, पैण्ड्र, अनपान और अंगत भी थे।
अनपानाद्दिविरथस्ततो धर्मरथोऽभवत् । रोमपादो धर्मरथाच्चतुरङ्गस्तदात्मजः ॥ १,१३९.
अनपान से दिविरथ हुए, उनसे धर्मरथ उत्पन्न हुए। धर्मरथ के पुत्र रोमपाद हुए, और रोमपाद के पुत्र चतुरंग थे।
पृथुलाक्षस्तस्य पुत्रश्चम्पोऽभूत्पृथुलाक्षतः । चम्पपुत्रश्च हर्यङ्गस्तस्य भद्ररथः सुतः ॥ १,१३९.
उनके पुत्र पृथुलाक्ष हुए, पृथुलाक्ष से चंपा उत्पन्न हुए। चंपा के पुत्र हर्यंग हुए, और हर्यंग के पुत्र भद्ररथ थे।
बृहत्कर्मा सुतस्तस्य बृहद्भानुस्ततोऽभवत् । बुहन्मना बृहाद्भानोस्तस्य पुत्रो जयद्रथः ॥ १,१३९.
भद्ररथ के पुत्र बृहतकर्मा हुए, उनसे बृहद्भानु उत्पन्न हुए। बृहद्भानु के पुत्र बुहनमना हुए, और उनके पुत्र जयद्रथ थे।
जयज्रथस्य विजयो विजयस्य धृतिः सुतः । धृतेर्धृव्रतः पुत्रः सत्यधर्मा धृतव्रतात् ॥ १,१३९.
जयद्रथ के पुत्र विजय हुए, विजय के पुत्र धृति हुए। धृति से धृतव्रत उत्पन्न हुए, और धृतव्रत से सत्यधर्मा हुए।
तस्य पुत्रस्त्वधिरथः कर्णस्तस्य सुतोऽभवत् ॥ १,१३९.
उनके पुत्र अधिरथ हुए, और अधिरथ के पुत्र कर्ण हुए।
वृर्षसेनस्तु कर्णस्य पुरुवंश्याञ्छणुष्व मे ॥ १,१३९.
कर्ण के पुत्र वृषसेन थे। अब मुझसे पुरुवंश के वंशजों के बारे में सुनो।
श्रीगरुडमहापुराणम् १४० हरिरुवाच । जनमेजयः पुरोश्चाभून्नमस्युर्जनमेजयात् । तस्य पुत्रश्चाभयदः सुद्युश्चाभयदादभूत् ॥ १,१४०.
हरि बोले— पूर्वकाल में जनमेजय हुए, जनमेजय से नमस्य उत्पन्न हुए। उनके पुत्र अभयद हुए, और अभयद से सुध्युस उत्पन्न हुए।
सुद्योर्बहुगतिः पुत्रः संजातिस्तस्य चात्मजः । वत्सजातिश्च सञ्जातेः रौद्राश्वश्च तदात्मजः ॥ १,१४०.
सुध्युस के पुत्र बहुगति हुए, उनके पुत्र संजाति हुए। संजाति के पुत्र वत्सजाति हुए, और वत्सजाति के पुत्र रौद्राश्व हुए।
ऋतेयुः स्थण्डिलेयुश्च कक्षेयुश्च कृतेयुकः । जलेयुः सन्ततेयुश्च रोद्राश्वस्य सुता वराः ॥ १,१४०.
रौद्राश्व के श्रेष्ठ पुत्र ऋतेयु, स्थण्डिलेयु, कक्षेयु, कृतियुक, जलेयु और संततेयु थे।
रतिनार ऋतेयोश्च तस्य प्रतिरथः सुतः । तस्य मेधातिथिः पुत्रस्तत्पुत्रश्चैनिलः स्मृतः ॥ १,१४०.
ऋतेयु के पुत्र रतिनार हुए, उनके पुत्र प्रतिरथ हुए। प्रतिरथ के पुत्र मेधातिथि हुए, और मेधातिथि के पुत्र ऐनिल हुए।
ऐनिलस्य तु दुष्यन्तो भरतस्तस्य चात्मजः । शकुन्तलायां संजज्ञे वितथो भरतादभूत् ॥ १,१४०.
ऐनिल के पुत्र दुष्यंत हुए, उनके पुत्र भरत हुए। भरत शकुंतला से उत्पन्न हुए, और भरत से वितथ हुए।
वितथस्य सुतो मन्युर्मन्योश्चैव नरः स्मृतः । नरस्य संकृतिः पुत्रो गर्गो वै संकृतेः सुतः ॥ १,१४०.
वितथ के पुत्र मन्यु हुए, मन्यु के पुत्र नर माने जाते हैं। नर के पुत्र संकृति हुए, और संकृति के पुत्र गर्ग हुए।
गर्गादमन्युः पुत्रो वै शिनिः पुत्रो व्यजायत । मन्युपुत्रान्महावीर्यात्सुतोऽभवदुरुक्षयः ॥ १,१४०.
गर्ग के पुत्र अमन्यु हुए, उनके पुत्र शिनि हुए। मन्यु के पराक्रमी पुत्रों में से उरुक्षय उत्पन्न हुए।
उरुक्षयात्त्रय्यारुणिर्व्यूहक्षत्राच्च मन्युजात् । सुहोत्रस्तस्य हस्ती च अजमीढद्विमीढकौ ॥ १,१४०.
उरुक्षय से त्रयारुणि हुए, और मन्यु से उत्पन्न व्यूहक्षत्र से सुहोत्र हुए। उनके पुत्र हस्ती, अजमीढ़ और विमीढ़क थे।
हस्तिनः पुरुमीढश्च कण्वोऽभूदजमीढतः । कण्वान्मेधातिथिर्जज्ञे यतः काण्वायना द्विजाः ॥ १,१४०.
हस्ती के पुत्र पुरुमीढ़ हुए, और अजमीढ़ से कण्व उत्पन्न हुए। कण्व से मेधातिथि हुए, जिनसे काण्वायन नामक द्विज उत्पन्न हुए।
अजमीढाद्वृहदिषुस्तत्पुत्रश्च बृहद्धनुः । बृहत्कर्मा तस्य पुत्रस्तस्य पुत्रो जयद्रथः ॥ १,१४०.
अजमीढ से वृहदिषु उत्पन्न हुए, उनके पुत्र बृहद्धनु थे। बृहद्धनु के पुत्र बृहत्कर्मा हुए और उनके पुत्र जयद्रथ हुए।
जयद्रथाद्विश्वजिच्च सेनजिच्च तदात्मजः । रुचिराश्वः सेनजितः पृथुसेनस्तदात्मजः ॥ १,१४०.
जयद्रथ से विश्वजित हुए, उनसे सेनजित, सेनजित के पुत्र रुचिराश्व और सेनजित से पृथुसेन हुए।
पारस्तु पृथुसेनस्य पाराद्द्वीपोऽभवन्नृपः । नृपस्य सृमरः पुत्रः सुकृतिश्च पृथोः सुतः ॥ १,१४०.
पृथुसेन के पुत्र पारा हुए, पारा से द्वीप नामक राजा हुए। उस राजा के पुत्र सृमर और पृथु के पुत्र सुकृति हुए।
विभ्राजः सुकृतेः पुत्रो विभ्राजादश्वहोऽभवत् । कृत्यां तस्माद्ब्रह्मदत्तो विष्वक्सेनस्तदात्मजः ॥ १,१४०.
सुकृति के पुत्र विभ्राज हुए, विभ्राज से अश्वह उत्पन्न हुए। उनसे कृत्या, फिर ब्रह्मदत्त और उनके पुत्र विश्वक्सेन हुए।
यवीनरो द्विमीढस्य धृतिमांश्च यवीनरात् । धतिमतः सत्यधृतिर्दृढनेमिस्तदात्मजः ॥ १,१४०.
द्विमीढ के पुत्र यवीनर हुए, यवीनर के पुत्र धृतिमान और धृतिमान से सत्यधृति तथा उनके पुत्र दृढ़नेमि हुए।
दृढनेमेः सुपार्श्वोऽभूत्सुपार्श्वात्सन्नतिस्तथा । कृस्तु सन्नतेः पुत्रः कृतादुग्रायुधोऽभवत् ॥ १,१४०.
दृढ़नेमि से सुपार्श्व हुए, सुपार्श्व से सन्नति, सन्नति के पुत्र कृष्टु और कृत से उग्रायुध उत्पन्न हुए।
उग्रायुधाच्च क्षेम्यौऽभूत्सुधीरस्तु तदात्मजः । पुरञ्जयः सुधीराच्च तस्य पुत्रो विदूरथः ॥ १,१४०.
उग्रायुध से क्षेम्य और उनके पुत्र सुधीर हुए। सुधीर से पुरंजय और उनके पुत्र विदूरथ हुए।
अजमीढान्नलिन्याञ्च नीलो नाम नृपोऽभवत् । नीलाच्छान्तिरभूत्पुत्रः सुशान्तिस्तस्य चात्मजः ॥ १,१४०.
अजमीढ और नलिनी से नील नामक राजा उत्पन्न हुए। नील के पुत्र शांति और उनके पुत्र सुशांति हुए।
सुशान्तेश्च पुरुर्जातो ह्यर्कस्तस्य सुतोऽभवत् । अर्कस्य चैव हर्यश्वो हर्यश्वान्मुकुलोऽभवत् ॥ १,१४०.
सुशांति से पुरुर जन्मे, उनके पुत्र अर्क हुए। अर्क से हर्यश्व और हर्यश्व से मुकुल उत्पन्न हुए।
यवीनरो बृहद्भानुः कम्पिल्लः सृञ्जयस्तथा । पाञ्चालान्मुकुलाज्जज्ञे शरद्वान्वैष्णवो महान् ॥ १,१४०.
यवीनर, बृहद्भानु, कम्पिल्ल और सृंजय जन्मे। मुकुल से पंचालों में विष्णुभक्त महान शरद्वान उत्पन्न हुए।
दिवोदासो द्वितीयोऽस्य ह्यहल्यायां शरद्वतः । शतानन्दोऽभवत्पुत्रस्तस्य सत्यधृतिः सतः ॥ १,१४०.
शरद्वान और अहल्या से द्वितीय पुत्र दिवोदास हुए। दिवोदास से शतानंद और उनके पुत्र सत्यधृति हुए।
कृपः कृपी सत्यधृतेरुर्वश्यां वीर्यहानितः । द्रोणपत्नी कृपी जज्ञे अश्वत्थामानमुत्तमम् ॥ १,१४०.
सत्यधृति और उर्वशी से कृप और कृपी उत्पन्न हुए, जो वीर्य-हानि के कारण जन्मे थे। द्रोण की पत्नी कृपी से उत्तम अश्वत्थामा जन्मे।