कीर्तिमांश्च सुषेणश्च ह्युदार्यो भद्रसेनकः । ऋजुदासो भद्रदेवः कंस एवावधीच्च तान् ॥ १,१३९.
कीर्तिमान, सुसेन, उदार्य, भद्रसेन, ऋजुदास और भद्रदेव—इन सबको कंस ने मार डाला।
संकर्षणः सप्तमोऽभूदष्टमः कृष्ण एव च । षोडशस्त्रीसहस्राणि भार्याणाञ्चाभवन्हरेः ॥ १,१३९.
संकर्षण सातवें और कृष्ण आठवें पुत्र हुए। हरि की सोलह हज़ार पत्नियाँ थीं।
रुक्मिणी सत्यभामा च लक्ष्मणा चारुहासिनी । श्रेष्ठा जाम्बवती चाष्टौ जज्ञिरे ताः सुतान्बहून् ॥ १,१३९.
रुक्मिणी, सत्यभामा, लक्ष्मणा सुंदर मुस्कान वाली, और श्रेष्ठ जाम्बवती—इन आठों ने अनेक पुत्रों को जन्म दिया।
प्रद्युम्नश्चारुदेष्णश्च प्रधानाः साम्ब एव च । प्रद्युम्नादनिरुद्धोऽभूत्ककुद्मिन्यां महाबलः ॥ १,१३९.
प्रद्युम्न, चारुदेष्ण और साम्ब प्रमुख पुत्र थे। प्रद्युम्न से ककुद्मिनी के द्वारा महाबली अनिरुद्ध उत्पन्न हुए।
अनिरुद्धात्सुभद्रायां वज्रो नाम नृपोऽभवत् । प्रतिबाहुर्वज्रसुतश्चारुस्तस्य सुतोऽभवत् ॥ १,१३९.
अनिरुद्ध और सुभद्रा से वज्र नामक राजा का जन्म हुआ। वज्र के पुत्र प्रतिबाहु और उनके पुत्र चारु थे।
वह्निस्तु तुर्वसोर्वंशे वह्नेर्भर्गोऽभवत्सुतः । भर्गाद्भानुरभूत्पुत्रो भानोः पुत्रः करन्धमः ॥ १,१३९.
वह्नि, तुर्यसु के वंश में थे। वह्नि से भर्ग, भर्ग से भानु, और भानु के पुत्र करंधम हुए।
करन्धमस्य मरुतो द्रुह्योर्वंशं निबोध मे । द्रह्योस्तु तनयः सेतुरारद्धश्च तदात्मजः ॥ १,१३९.
करंधम के पुत्र मरुत हुए। अब मुझसे द्रुह्यु के वंश को सुनो। द्रुह्यु के पुत्र सेतु और उनके पुत्र आरद्ध हुए।
आरद्धस्यैव गान्ध रो घर्मो गान्धारतोऽभवत् । घृतस्तु घर्मपुत्रोऽभूद्दुर्गमश्च घृस्य तु ॥ १,१३९.
आरद्ध से गांधार, गांधार से घर्म, घर्म से घृत, और घृत से दुर्गम का जन्म हुआ।
प्रचेता दुर्गमस्यैव अनोर्वंशं शृणुष्व मे । अनोः सभानरः पुत्रस्तस्मा कालञ्जयोऽभवत् ॥ १,१३९.
दुर्गम के पुत्र प्रचेता हुए। अब अनु के वंश को सुनो। अनु के पुत्र सभानर और उनसे कालंजय उत्पन्न हुए।
कालञ्जयात्सृञ्जयोऽभूत्सृञ्जयात्तु पुरुञ्जयः । जनमेजयस्तु तत्पुत्रो महाशालस्तदात्मजः ॥ १,१३९.
कालंजय से सृंजय, सृंजय से पुरुंजय, उनके पुत्र जनमेजय और उनके पुत्र महाशाल हुए।
महामना महाशालदुशीनर इह स्मृतः । अशीनराच्छिबिर्जज्ञे वृषदर्भः शिवेः सुतः ॥ १,१३९.
यहाँ महा-मनस्वी महाशाल दुशीनर के नाम से प्रसिद्ध हैं। असीनर से शिबि उत्पन्न हुए, और शिबि के पुत्र वृषदर्भ हुए।
महामनोजात्तितिक्षोः पुत्रोऽभूच्च रुषद्रथः । हेमो रुषद्रथाज्जज्ञे सुतपा हेमतोऽभवत् ॥ १,१३९.
महा-मनोजात के पुत्र तितिक्षु के पुत्र रुषद्रथ हुए। रुषद्रथ से हेम उत्पन्न हुए, और हेम से सुतपा हुए।
बलिः सुतपसो जज्ञे ह्यङ्गवङ्गकलिङ्गकाः । अन्धः पैण्ड्रश्च बालेया ह्यनपानस्तथाङ्गतः ॥ १,१३९.
सुतपा से बली उत्पन्न हुए, और उनसे अंग, वंग, कलिंग आदि हुए। बली के पुत्रों में अंध, पैण्ड्र, अनपान और अंगत भी थे।
अनपानाद्दिविरथस्ततो धर्मरथोऽभवत् । रोमपादो धर्मरथाच्चतुरङ्गस्तदात्मजः ॥ १,१३९.
अनपान से दिविरथ हुए, उनसे धर्मरथ उत्पन्न हुए। धर्मरथ के पुत्र रोमपाद हुए, और रोमपाद के पुत्र चतुरंग थे।
पृथुलाक्षस्तस्य पुत्रश्चम्पोऽभूत्पृथुलाक्षतः । चम्पपुत्रश्च हर्यङ्गस्तस्य भद्ररथः सुतः ॥ १,१३९.
उनके पुत्र पृथुलाक्ष हुए, पृथुलाक्ष से चंपा उत्पन्न हुए। चंपा के पुत्र हर्यंग हुए, और हर्यंग के पुत्र भद्ररथ थे।
बृहत्कर्मा सुतस्तस्य बृहद्भानुस्ततोऽभवत् । बुहन्मना बृहाद्भानोस्तस्य पुत्रो जयद्रथः ॥ १,१३९.
भद्ररथ के पुत्र बृहतकर्मा हुए, उनसे बृहद्भानु उत्पन्न हुए। बृहद्भानु के पुत्र बुहनमना हुए, और उनके पुत्र जयद्रथ थे।
जयज्रथस्य विजयो विजयस्य धृतिः सुतः । धृतेर्धृव्रतः पुत्रः सत्यधर्मा धृतव्रतात् ॥ १,१३९.
जयद्रथ के पुत्र विजय हुए, विजय के पुत्र धृति हुए। धृति से धृतव्रत उत्पन्न हुए, और धृतव्रत से सत्यधर्मा हुए।
तस्य पुत्रस्त्वधिरथः कर्णस्तस्य सुतोऽभवत् ॥ १,१३९.
उनके पुत्र अधिरथ हुए, और अधिरथ के पुत्र कर्ण हुए।
वृर्षसेनस्तु कर्णस्य पुरुवंश्याञ्छणुष्व मे ॥ १,१३९.
कर्ण के पुत्र वृषसेन थे। अब मुझसे पुरुवंश के वंशजों के बारे में सुनो।
श्रीगरुडमहापुराणम् १४० हरिरुवाच । जनमेजयः पुरोश्चाभून्नमस्युर्जनमेजयात् । तस्य पुत्रश्चाभयदः सुद्युश्चाभयदादभूत् ॥ १,१४०.
हरि बोले— पूर्वकाल में जनमेजय हुए, जनमेजय से नमस्य उत्पन्न हुए। उनके पुत्र अभयद हुए, और अभयद से सुध्युस उत्पन्न हुए।
सुद्योर्बहुगतिः पुत्रः संजातिस्तस्य चात्मजः । वत्सजातिश्च सञ्जातेः रौद्राश्वश्च तदात्मजः ॥ १,१४०.
सुध्युस के पुत्र बहुगति हुए, उनके पुत्र संजाति हुए। संजाति के पुत्र वत्सजाति हुए, और वत्सजाति के पुत्र रौद्राश्व हुए।
ऋतेयुः स्थण्डिलेयुश्च कक्षेयुश्च कृतेयुकः । जलेयुः सन्ततेयुश्च रोद्राश्वस्य सुता वराः ॥ १,१४०.
रौद्राश्व के श्रेष्ठ पुत्र ऋतेयु, स्थण्डिलेयु, कक्षेयु, कृतियुक, जलेयु और संततेयु थे।
रतिनार ऋतेयोश्च तस्य प्रतिरथः सुतः । तस्य मेधातिथिः पुत्रस्तत्पुत्रश्चैनिलः स्मृतः ॥ १,१४०.
ऋतेयु के पुत्र रतिनार हुए, उनके पुत्र प्रतिरथ हुए। प्रतिरथ के पुत्र मेधातिथि हुए, और मेधातिथि के पुत्र ऐनिल हुए।
ऐनिलस्य तु दुष्यन्तो भरतस्तस्य चात्मजः । शकुन्तलायां संजज्ञे वितथो भरतादभूत् ॥ १,१४०.
ऐनिल के पुत्र दुष्यंत हुए, उनके पुत्र भरत हुए। भरत शकुंतला से उत्पन्न हुए, और भरत से वितथ हुए।
वितथस्य सुतो मन्युर्मन्योश्चैव नरः स्मृतः । नरस्य संकृतिः पुत्रो गर्गो वै संकृतेः सुतः ॥ १,१४०.
वितथ के पुत्र मन्यु हुए, मन्यु के पुत्र नर माने जाते हैं। नर के पुत्र संकृति हुए, और संकृति के पुत्र गर्ग हुए।
गर्गादमन्युः पुत्रो वै शिनिः पुत्रो व्यजायत । मन्युपुत्रान्महावीर्यात्सुतोऽभवदुरुक्षयः ॥ १,१४०.
गर्ग के पुत्र अमन्यु हुए, उनके पुत्र शिनि हुए। मन्यु के पराक्रमी पुत्रों में से उरुक्षय उत्पन्न हुए।
उरुक्षयात्त्रय्यारुणिर्व्यूहक्षत्राच्च मन्युजात् । सुहोत्रस्तस्य हस्ती च अजमीढद्विमीढकौ ॥ १,१४०.
उरुक्षय से त्रयारुणि हुए, और मन्यु से उत्पन्न व्यूहक्षत्र से सुहोत्र हुए। उनके पुत्र हस्ती, अजमीढ़ और विमीढ़क थे।
हस्तिनः पुरुमीढश्च कण्वोऽभूदजमीढतः । कण्वान्मेधातिथिर्जज्ञे यतः काण्वायना द्विजाः ॥ १,१४०.
हस्ती के पुत्र पुरुमीढ़ हुए, और अजमीढ़ से कण्व उत्पन्न हुए। कण्व से मेधातिथि हुए, जिनसे काण्वायन नामक द्विज उत्पन्न हुए।
अजमीढाद्वृहदिषुस्तत्पुत्रश्च बृहद्धनुः । बृहत्कर्मा तस्य पुत्रस्तस्य पुत्रो जयद्रथः ॥ १,१४०.
अजमीढ से वृहदिषु उत्पन्न हुए, उनके पुत्र बृहद्धनु थे। बृहद्धनु के पुत्र बृहत्कर्मा हुए और उनके पुत्र जयद्रथ हुए।
जयद्रथाद्विश्वजिच्च सेनजिच्च तदात्मजः । रुचिराश्वः सेनजितः पृथुसेनस्तदात्मजः ॥ १,१४०.
जयद्रथ से विश्वजित हुए, उनसे सेनजित, सेनजित के पुत्र रुचिराश्व और सेनजित से पृथुसेन हुए।