कणोषणोपकुल्या स्याच्छ्रेयसी गजपिप्पली । चव्यन्तु चविका काकचिञ्ची गुञ्चे तु कृष्णला ।। ३६३.
कण, उषण और उपकुल्या के लिए गजपिप्पली सबसे उत्तम है। चव्य और चविका, काकचिंची, और गुंचा के लिए कृष्णला श्रेष्ठ मानी गई है।
विश्वा विषा प्रतिविषा वनश्रृङ्गाटगोक्षुरौ । नारायणी शतमूली कालेयकहरिद्रवः ।। ३६३.
विश्वा, विषा, प्रतिविषा, वनशृंगाटा, गोक्षुर, नारायणी, शतमूली, कालेयक और हरिद्रा — ये सब भी महत्वपूर्ण हैं।
दार्वी पचम्पचा दारु शुक्ला हैमवती वचा । वचोग्रगन्धा षड्ग्रन्था गोलोमी शतपर्विंका ।। ३६३.
दार्वी, पचंपचा, दारु, शुक्ला, हैमवती, वचा, तीव्र गंध वाली वचा, षड्ग्रंथा, गोलोमी और शतपर्विंका — ये सब भी गिने जाते हैं।
आस्फोता गिरिकर्णी स्यात् सिंहास्यो वासको वृषः । मिशी मधुरिकाच्छत्रा कोकिलाक्षेक्षुरक्षुरा ।। ३६३.
आस्फोटा, गिरिकर्णी, सिंहास्य, वासक, वृष, मिश्री, मधुरिका, छत्रा, कोकिलाक्ष, इक्षु और क्षुरा — ये सभी भी उल्लेखनीय हैं।
विडङ्गोऽस्त्री कृमिघ्नः स्यात् वज्रद्रुस्रुक्स्नुही सुधा । गृद्वीका गोस्तनी द्राक्षा वला वाट्यालकस्तथा ।। ३६३.
विडंग, अश्त्री, कृमिघ्न, वज्रद्रु, स्रुक्स्नुही, सुधा, गृद्विका, गोस्तनी, द्राक्षा, वला और वाट्यालक — ये भी शामिल हैं।
काला मसूरविदला त्रिपुटा त्रिवृत् । मधुकं क्लीतकं यष्टिमधुका मधुयष्टिका ।। ३६३.
काला, मसूर, विदला, त्रिपुटा, त्रिवृत, मधुक, क्लीतक, यष्टिमधुक और मधुयष्टिका — ये सब भी गिने जाते हैं।
विदारी क्षीरशुक्लेक्षुगन्धा क्रोष्ट्री च या सिता । गोपी श्यामा शारिवा स्यादनन्तोत्पलशारिवा ।। ३६३.
विदारी, क्षीरशुक्ल, इक्षुगंधा, क्रोष्ट्री, या, सिता, गोपी, श्यामा, शारिवा, अनंता और उत्पलशारिवा — ये भी महत्वपूर्ण हैं।
मोचा रम्भा च कदली भष्टाकी दुष्प्रधर्षिणी । स्थिरा ध्रुवा सालपर्णी श्रृङ्गी तु वृषभो वृषः ।। ३६३.
मोचा, रम्भा, कदली, भष्टाकी, दुष्प्रधर्षिणी, स्थिरा, ध्रुवा, सालपर्णी, श्रृंगी, वृषभ और वृष — ये भी गिने जाते हैं।
गाङ्गेरुकी नागबला मुषली तालमूलिका । ज्योत्स्नी पटोलिका जाली अजश्रृङ्गी विषाणिका ।। ३६३.
गांगेरुकी, नागबला, मुषली, तालमूलिका, ज्योत्स्नी, पटोलिका, जाली, अजशृंगी और विषाणिका — ये सब भी उल्लेखनीय हैं।
स्याल्लाङ्गलिक्यग्निशिखा ताम्बूली गगवल्ल्यपि । हरेणू रेणुका कौन्ती ह्रीवेरो दिव्यनागरं ।। ३६३.
लांगलिकी, अग्निशिखा, तांबूली, गगवली, हरेणू, रेणुका, कौन्ती, ह्रीवेर और दिव्यनागर — ये भी शामिल हैं।
कालानुसार्य्यवृद्धाश्मपुष्पशीतशिवानि तु । शिवा तामलकी चाथ हनुर्हट्टविलासिनी ।। ३६३.
कालानुसार्य, वृद्धाश्म, पुष्पशीता, शिवानि, शिवा, तामलकी और हनुरहट्टविलासिनी — ये सब भी गिने जाते हैं।
ग्रन्थिपर्णं शुकं वर्हि वला तु त्रिपुटा त्रुटिः । शिवा तामलकी चाथ हनुर्हट्टविलासिनी ।। ३६३.
ग्रंथिपर्ण, शुक, वर्हि, वला, त्रिपुटा, त्रुटि, शिवा, तामलकी और हनुरहट्टविलासिनी — ये भी शामिल हैं।
कुटं नटं दशपुरं वानेयं परिपेलवम् । तपस्विनी जटामांसी पृक्का देवी लता लक्षू ।। ३६३.
कुट, नट, दशपुर, वानेय, परिपेलव, तपस्विनी, जटामांसी, पृक्का, देवी, लता और लक्षू — ये सब भी गिने जाते हैं।
कर्चुरको द्राविड़को गन्धमूली शठी स्मृता । स्यादृक्षगन्धा छगलान्त्रा वेगी वृद्धदारकः ।। ३६३.
कर्चुरक, द्राविरक, गंधमूली, शठी, ऋक्षगंधा, छगलांत्रा, वेगी और वृद्धदारक — ये भी महत्वपूर्ण हैं।
तुण्डिकेरी रक्तफला विम्बिका पीलुपर्ण्यऽपि । चाङ्गेरी चुक्रिकाम्बष्ठा स्वर्णक्षीरी हिमावती ।। ३६३.
टुंडिकेरी, रक्तफला, विम्बिका, पीलुपर्णी, चांगेरी, चुक्रिका, अंबष्ठा, स्वर्णक्षीरी और हिमावती — ये भी गिने जाते हैं।
सहस्रवेधी चुक्रोऽम्लवेतसः शतवेध्यपि । जीवन्ती जीवनी जीवा भूमिनिम्बः किरातकः ।। ३६३.
सहस्रवेधी, चुक्र, आम्लवेतस, शतवेधी, जीवंती, जीवनी, जीवा, भूमिनिंब और किरातक — ये सभी भी उल्लेखनीय हैं।
कूर्चशीर्षो मधुकरश्चन्द्रः कपिवृकस्तथा । दद्रुघ्नः स्यादेड़गजो वर्षाभूः शोथहारिणी ।। ३६३.
कूर्चशीर्ष, मधुकर, चंद्र, कपिवृक, दद्रुघ्न, अडेरगज, वर्षाभू और शोथहारीणी — ये भी गिने जाते हैं।
वाराही वदरा गृष्टिः काकमाची तु वायसी । शतपुष्पा सिचच्छत्राऽतिच्छत्रा मधुरा मिसिः ।। ३६३.
वाराही, वदरा, गृष्टि, काकमांची, वायसी, शतपुष्पा, सिचच्छत्रा, अतिक्षत्रा, मधुरा और मिश्री — ये भी शामिल हैं।
अवाक्पुष्पी कारवी च सरणा तु प्रसारणी । कटम्भरी भद्रवला कर्व्वूरश्च शटी ह्यथ ।। ३६३.
अवाक्पुष्पी, कारवी, सरणा, प्रसारणी, कटंभरी, भद्रवला, कर्वूर और शटी ये सब हैं।
पटोलः कुलकस्तिक्तः कारवेल्लः कटिल्लकः । कुष्माण्डकस्तु कर्कारुरिर्वारुः कर्कटी स्त्रियौ ।। ३६३.
पटोल, कुलक, तिक्त, कारवेल्ल, कटिल्लक, कुष्मांडक, कर्कारु, वारु और कर्कटी — ये सब स्त्रीलिंग शब्द हैं।
इक्ष्वाकुः कटुतुम्बी स्याद्विशाला त्विन्द्रावरुणी । अर्शोघ्नः शूरणः कन्दो मुस्तकः कुरुविन्दकः ।। ३६३.
इक्ष्वाकु, कटुतुम्बी, विशाल, इन्द्रावरुणी, अर्शोघ्न, शूरण, कंद, मुस्तक और कुरुविंदक — ये सब हैं।
वंशे त्वक्सारकर्म्मारवेणुमस्करतेजनाः । छत्रातिच्छत्रपालघ्नी मालातृणकभूस्तृणे ।। ३६३.
वंश में त्वक्सार, कर्मार, वेणु, मस्कर और तेजना; छत्रा, अतिछत्र, पालतू को मारने वाली, मालातृण और भूस्तृण — ये सब हैं।
तृणराजाह्वयस्तालो घोण्टा क्रमुकपुगकौ । शार्दूलद्वीपिनौ व्याघ्ने हर्य्यक्षः केशरी हरिः ।। ३६३.
तृणराज, ताल, घोंटा, क्रमुक, पुग, शार्दूल, द्वीपिन, व्याघ्र, हर्यक्श, केशरी और हरि — ये सब हैं।
कोलः पोत्री वराहः स्यात् कोक ईहामृगो वृकः । लूतोर्णनाभौ तु समौ तन्तुवायश्च मर्कटे ।। ३६३.
कोल, पोत्री, वराह, कोक, ईहामृग, वृक, लूत, उर्णनाभ, तंतुकार और मर्कट — ये सब हैं।
वृश्चिकः शूककीटः स्यात्सारङ्गस्तोककौ समौ । कृकवाकुस्ताम्रचूड़ः पिकः कोकिल इत्यपि ।। ३६३.
वृश्चिक, शूककीट, सारंग, तोकक, कुक्कुट, ताम्रचूड़, पिक और कोकिल — ये सब हैं।
काके तु करटारिष्टौ वकः कह्व उदाहृतः । कोकश्चक्रश्चक्रवाको कादम्बः कलहंसकः ।। ३६३.
काक, करट, अरिष्ट, वक, कह्व, कोक, चक्र, चक्रवाक, कादंब और कलहंसक — ये सब हैं।
पतङ्गिका पुत्तिका स्यात्सरघा मधुमक्षइका । द्विरेफपुष्पलिड्भृङ्गषट्पदभ्रमराऽलयः ।। ३६३.
पतंगिका, पुत्तिका, सरगा, मधुमक्खी, द्विरेफ, पुष्पलिड, भृंग, षट्पद, भ्रमर और आलय — ये सब हैं।
केकी शिख्यस्य वाक्केका शकुन्तिशकुनिद्विजाः । स्त्री पक्षतिः पक्षमूलञ्चञ्चूस्तोटिरुभे स्त्रियौ ।। ३६३.
केकी, शिखी की मादा है; वाक्केका, शकुंती, शकुनिद्विजा, स्त्री, पक्षति, पक्षमूल, चंचु और तोटी — ये दोनों भी स्त्रीलिंग हैं।
गतिरुडडीनसण्डीनौ कुलायो नीड़मस्त्रियां । पेशी कोषो द्विहीनेऽण्डं पृथुकः शावकः शिशु ।। ३६३.
गति, रुड़ड़ी, नसंड़ी — ये स्त्रीलिंग हैं; कुलाय नपुंसक है; पेशी, कोश, द्विहीन, अंड, पृथुक, शावक और शिशु — ये सब हैं।
पोतः पाकोऽर्भको डिम्भः सन्दोहव्यूहको गणः । स्तोमौवनिकरव्राता निकुरम्बं कदम्बकं ३६३.
पोत, पाक, अर्भक, डिंभ, संदोह, व्यूहक, गण, स्तोम, वनिकर, व्रात, निकुरंब और कदंबक — ये सब हैं।