एक बार की बात है, एक पवित्र घाट की रक्षा करने वाले प्रहरी वहां उपस्थित थे। वे अपने सींगों को फूंकते हुए बैठते हैं, मानो किसी बड़े आगमन की घोषणा कर रहे हों। तभी एक महान घोड़े का आगमन होता है, और सब उसे देखकर कहते हैं—यह तुम्हारा महान आगमन है, हे घोड़े। वह घोड़ा अपने साथी के साथ मिलकर प्रयत्न करता है, दोनों मिलकर आगे बढ़ते हैं। घर में एक स्त्री है, जो गोधन से सम्पन्न है, और गायों के साथ चलती है—ऐसा कहा जाता है। वहीं एक पुरुष कुशा घास पर लेटा हुआ है। एक युवा पक्षी बांधा गया है, ऐसा भी कहा जाता है। और उसके पाप भी बांध दिए गए हैं—यह भी कहा जाता है। तभी केविका जाग उठती है। अब घोड़े की बारी आती है, वह गाय के खुर के चिन्हों के पास पहुंचता है। वह स्त्री गरुड़ की स्वामिनी है। उसकी जीभ स्वस्थ है, किसी रोग से मुक्त है। अब प्रश्न उठता है—हे श्रेष्ठ, किसके पास बहुत सारे तीर हैं? किसके पास काली गाय का दूध है? किसके पास सफेद गाय का दूध है? किसके पास गहरे रंग की गाय का दूध है? पूछो, पूछो—कहां है? पूछो पकाए हुए के बारे में, पूछो पके हुए के बारे में। जौ उगाने वाला तपस्वियों के बीच कुभी पात्र लेकर घूमता है। जो स्थिर हैं, वे ही कुएं बनाने वाले हैं। आमणक वही मणत्सक है। हे देवता, तुम सूर्य के लिए अद्वितीय हो। यह अर्पण पांच भागों में तैयार किया गया है। वह पुरस्कार की खोज में आगे बढ़ता है। एक सींग उठता है। साथी तुम्हें हानि न पहुंचाए, और न ही वह तुम्हें जान सके। वे गाय के बछड़े के पास जाते हैं। भोजन और पेय जानने वाले को दो। अब, आगे बढ़ते हुए—ऐसा ही। अब, इसी तरह आगे बढ़ते हुए। कुत्ता हमारे लिए दृढ़ हो जाए, या कुत्ता स्थिर हो जाए। मापने वाली छड़ी पतली है, या यह पतली मापने की छड़ी है। ‘आमिनोनिति’ कहने से वह समृद्ध होता है। उसका पुनरावृत्ति ही उसका टूटना है। वरुण धन के साथ चलता है। सौ भारती शक्तियाँ हैं। सौ स्वर्णिम घोड़े, सौ स्वर्णिम रथ, सौ स्वर्णिम कुल्हाड़ियाँ—अहुला, कुशा, वर्त्तका। वह खुर से हिलाया जाता है। स्त्री वन के साथ आती है। नाव को वन में निवास करने वाले लोग पकड़ लेते हैं। इस तरह, घाट की रक्षा, गाय, घोड़ा, स्त्री, तपस्वी, देवता, वरुण, कुत्ता, नाव—सब मिलकर एक दिव्य कथा में बंध जाते हैं, जिसमें प्रकृति, धन, और जीवन के विविध रंग एक साथ झलकते हैं।